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चंद्रा टाइम्स

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बसनही थाना क्षेत्र में खौफनाक वारदात: डॉक्टर की दुकान पर हमला



झिटकिया गांव में शनिवार की देर शाम एक ऐसा मंजर सामने आया जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। बसनही थाना क्षेत्र के सरोनी मधेपुरा पंचायत में स्थित इस छोटे से गांव में, हर कोई अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जी रहा था। लेकिन एक पल में सब बदल गया।

गांव के ही रहने वाले बमबम मंडल, जिन्हें स्थानीय लोग रेवती रमण के नाम से भी जानते थे, हमेशा की तरह अपने दवा दुकान पर बैठे थे। एक साधारण ग्रामीण चिकित्सक, जो गांव के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा का बड़ा सहारा थे। वे अपनी कुर्सी पर बैठे मरीजों को दवाइयां दे रहे थे। किसी को नहीं पता था कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी दिन होगा।

अचानक दुकान के अंदर अज्ञात अपराधी दाखिल होते हैं। उनकी मंशा साफ थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि वे इतना बड़ा कदम उठाएंगे। जब तक कोई कुछ समझ पाता, उन्होंने बमबम मंडल के सिर में गोली दाग दी। गोली की आवाज पूरे इलाके में गूंज गई। यह आवाज उस खौफनाक पल का गवाह थी जिसने बमबम मंडल की जिंदगी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।

गोली लगने के बाद, बमबम मंडल कुर्सी से नीचे गिर पड़े। आसपास के लोग, जो गोली की आवाज सुनकर दौड़ते हुए दुकान तक पहुंचे, उन्होंने देखा कि बमबम मंडल खून से लथपथ जमीन पर पड़े थे। उनके शरीर में कोई हरकत नहीं थी। घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो चुकी थी।

गांव में अफरा-तफरी मच गई। हर कोई सहमा हुआ था। कुछ ने तुरंत पुलिस को खबर दी, तो कुछ उनके परिवार वालों को बुलाने भागे। उनके परिजन, जो इस घटना से पूरी तरह टूट चुके थे, दुकान तक पहुंचे लेकिन वे भी यह समझने की हालत में नहीं थे कि आखिर यह सब हुआ क्यों।

पुलिस मौके पर पहुंची। बसनही थाना के थानाध्यक्ष और उनकी टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। शुरुआती जांच में पुलिस ने बताया कि यह हत्या पूरी तरह से सुनियोजित लग रही है। अपराधी पहले से जानते थे कि बमबम मंडल कब और कहां मिलेंगे। उन्होंने उनके सिर में गोली मारकर उन्हें तुरंत मौत के घाट उतार दिया और मौके से फरार हो गए।

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और इलाके में जांच शुरू कर दी। स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है, लेकिन किसी ने भी अपराधियों को पहचानने या उनकी मंशा को लेकर कोई जानकारी नहीं दी। पुलिस का कहना है कि अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

इस घटना ने गांववालों को गहरे सदमे में डाल दिया है। बमबम मंडल सिर्फ एक चिकित्सक नहीं थे, वे गांववालों के लिए उम्मीद का चेहरा थे। जब भी किसी को दवा या सलाह की जरूरत होती, वे हर वक्त मदद के लिए तैयार रहते। लेकिन अब उनकी मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है।

बमबम मंडल का परिवार पूरी तरह से टूट चुका है। उनकी पत्नी और बच्चे गहरे सदमे में हैं। किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं। गांव में मातम का माहौल है। हर कोई यही पूछ रहा है कि आखिर बमबम मंडल को मारने की वजह क्या थी?

इस घटना ने एक बार फिर उस खौफनाक सच्चाई को उजागर किया है जो छोटे शहरों और गांवों में भी अपराधियों की बेखौफ मानसिकता को दिखाती है। एक तरफ जहां पुलिस जांच में जुटी है, वहीं दूसरी ओर गांववाले यह प्रार्थना कर रहे हैं कि बमबम मंडल के हत्यारों को जल्द से जल्द सजा मिले।

यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है। जहां एक तरफ लोग दूसरों की मदद करने के लिए आगे आते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इतने निर्दयी होते हैं कि इंसान की जान लेने से भी नहीं हिचकिचाते। बमबम मंडल की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं है, यह समाज के लिए एक चेतावनी है।

अब सभी की नजरें पुलिस की जांच पर टिकी हैं। क्या बमबम मंडल को न्याय मिलेगा? क्या उनके हत्यारे पकड़े जाएंगे? या यह घटना भी उन कई मामलों की तरह अंधेरे में खो जाएगी? इन सवालों के जवाब तो समय के साथ मिलेंगे, लेकिन फिलहाल गांव में सिर्फ मातम और खामोशी है।

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