जमुई में आयोजित बिहार स्टेट डांस स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में सहरसा के बच्चों ने अपने शानदार प्रदर्शन से न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि पूरे राज्य में अपनी पहचान बनाई। इस प्रतियोगिता का आयोजन बिहार डांस स्पोर्ट्स यूनिट एवं परफॉर्मिंग आर्ट भारत के संयुक्त प्रयास से किया गया था। पूरे बिहार से लगभग 300 बच्चों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया, जिसमें सहरसा के 31 बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
सहरसा का स्वर्णिम प्रदर्शन
सहरसा के बच्चों ने विभिन्न श्रेणियों में कुल 18 पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। इनमें 3 स्वर्ण पदक, 7 रजत पदक और 8 कांस्य पदक शामिल हैं। सहरसा के बच्चों का प्रदर्शन हर श्रेणी में उत्कृष्ट रहा, जिससे उन्होंने अन्य जिलों को कड़ी टक्कर दी।
स्वर्ण पदक विजेता:
- समूह नृत्य: झिझिया गर्ल्स ने अपनी परंपरागत शैली और सामंजस्यपूर्ण प्रदर्शन से पहला स्वर्ण पदक जीता।
- व्यक्तिगत श्रेणी: प्रांशी मांधाना ने दूसरा स्वर्ण पदक जीता।
- कन्हैया केशरी ने अपनी अद्वितीय प्रस्तुति के दम पर तीसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
रजत पदक विजेता: अक्षय, पुष्कर, पवित्रा, आदित्य, स्नेहल, कृति काव्या, और प्रिंस ने रजत पदक जीते। उनकी प्रस्तुतियों में नवीनता और जोश ने निर्णायकों को प्रभावित किया।
कांस्य पदक विजेता: धृति रॉय, आद्या, कनिष्क, वैष्णवी अग्रवाल, वैष्णवी कश्यप, प्रज्ञा, रिया दास, और दीपक ने कांस्य पदक हासिल किया। इन बच्चों ने अपनी मेहनत और लगन से यह उपलब्धि हासिल की।
नवीन सिंह राजपूत का कुशल नेतृत्व
सहरसा के सिटी इंचार्ज और बिहार डांस स्पोर्ट्स यूनिट के टेक्निकल इंचार्ज नवीन सिंह राजपूत के नेतृत्व में बच्चों ने पूरे राज्य में अपनी पहचान बनाई। बच्चों ने पिछले तीन महीनों से स्ट्रीट डांस एकेडमी में इस प्रतियोगिता की तैयारी की थी। उनके कठिन प्रशिक्षण और मार्गदर्शन ने बच्चों को सफलता की ओर अग्रसर किया।
नेशनल चैंपियनशिप की तैयारी
इस प्रतियोगिता में चयनित बच्चों का अगला पड़ाव नेशनल चैंपियनशिप है। वे जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे और उम्मीद है कि वहां भी सहरसा का परचम लहराएंगे।
सहरसा के लिए गौरव का पल
सहरसा के बच्चों की इस उपलब्धि ने जिले को गौरवान्वित किया है। स्थानीय जनता और प्रशासन ने इन बच्चों को बधाई दी है और उनकी सफलता की कामना की है। यह उपलब्धि न केवल सहरसा के बच्चों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि उनके प्रशिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग का भी प्रमाण है।
यह प्रतियोगिता बच्चों के लिए न केवल एक मंच साबित हुई, बल्कि उनकी कला और संस्कृति को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का भी एक सुनहरा अवसर बनी। सहरसा के बच्चों ने यह दिखा दिया कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
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