संवाददाता, भागलपुर: बिहार में एक बार फिर सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि की दबंगई सामने आई है। भागलपुर में जदयू सांसद अजय मंडल पर पत्रकारों के साथ मारपीट, गाली-गलौज और जानलेवा हमला करने का आरोप लगा है। यह घटना भागलपुर हवाई अड्डे पर हुई, जहां सांसद और उनके समर्थकों ने पत्रकारों को न केवल जमीन पर पटक-पटककर पीटा, बल्कि उनके मोबाइल फोन भी छीन लिए। इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने नीतीश सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, वहीं जदयू सांसद ने अपनी सफाई भी पेश की है।
क्या है पूरा मामला?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के तहत 28 जनवरी को वे कटिहार में थे। खराब मौसम की स्थिति में उनके हेलीकॉप्टर के भागलपुर में लैंड करने की संभावना थी, जिसके चलते प्रशासन हाई अलर्ट पर था। इसी दौरान, जदयू सांसद अजय मंडल अपने काफिले के साथ हवाई अड्डे पहुंचे।
मौके पर सुरक्षा कड़ी थी, और प्रशासनिक अधिकारी गाड़ियों की जांच कर रहे थे। इसी बीच, सांसद की एक गाड़ी को गेट पर रोक दिया गया, जिसमें कई महिलाएं और कार्यकर्ता मौजूद थे। पत्रकारों ने इस पूरी घटना की तस्वीरें लेनी शुरू कर दीं, जिसके बाद सांसद अजय मंडल भड़क उठे।
पत्रकारों पर हमला: मारपीट, गाली-गलौज और मोबाइल छीना
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही पत्रकारों ने गाड़ी रोकने की तस्वीरें लीं, सांसद और उनके समर्थकों ने गुस्से में पत्रकारों के साथ बदसलूकी शुरू कर दी। आरोप है कि दो पत्रकारों को जमीन पर पटककर बेरहमी से पीटा गया।
इतना ही नहीं, सांसद के समर्थकों ने पत्रकारों के मोबाइल और अन्य सामान भी छीन लिए। करीब आधे घंटे तक हवाई अड्डे पर अफरातफरी का माहौल रहा।
वहीं, घटना के दौरान पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे रहे और किसी ने भी सांसद को रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई।
सांसद अजय मंडल ने दी सफाई
घटना के बाद सांसद अजय मंडल ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि—
"हम मुख्यमंत्री से मिलने भागलपुर हवाई अड्डा गए थे। गेट पर हमारी गाड़ी की जांच हो रही थी। इसी दौरान, एक पत्रकार ने हमारी गाड़ी के शीशे पर तेज़ी से ठक-ठक किया, जिससे बॉडीगार्ड ने उन्हें रोका। इसी बीच पत्रकार गिर पड़े और फिर दोनों पक्षों में झड़प हो गई।"
गाली-गलौज के आरोपों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने पत्रकारों को नहीं, बल्कि अपने बॉडीगार्ड को डांटा था।
घायल पत्रकार अस्पताल में भर्ती
सांसद और उनके समर्थकों द्वारा किए गए हमले में घायल दो पत्रकारों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
सत्ता का दबाव? पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल
यह मामला बिहार के सत्ताधारी दल जदयू के सांसद से जुड़ा होने के कारण पुलिस कार्रवाई करने से बचती नजर आ रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मामले में क्या कदम उठाएंगे?
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सत्ता पक्ष के किसी जनप्रतिनिधि पर पत्रकारों से बदसलूकी के आरोप लगे हों। इससे पहले, भागलपुर के गोपालपुर से विधायक गोपाल मंडल ने भी पत्रकारों को धमकाया था और गुस्से में आकर पिस्टल तक निकाल ली थी।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
जदयू सांसद द्वारा पत्रकारों की पिटाई के बाद विपक्षी दलों ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
तेजस्वी यादव (राजद) ने क्या कहा?
राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा—
"बिहार में अपराध अपने चरम पर है। हर रोज़ गोलीबारी हो रही है, पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं और मुख्यमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं।"
विधायक अजीत शर्मा (कांग्रेस) ने क्या कहा?
भागलपुर के कांग्रेस विधायक अजीत शर्मा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा—
"सांसद अजय मंडल का यह कृत्य लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला है। मीडिया को दबाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन को अविलंब कार्रवाई कर सांसद को गिरफ्तार करना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि—
"अगर इस घटना पर त्वरित कार्रवाई नहीं की गई तो कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाएगी।"
क्या सांसद नशे में थे?
चर्चा यह भी है कि घटना के दौरान सांसद नशे में चूर थे और पत्रकारों के साथ मारपीट कर रहे थे। इस दौरान वहां मौजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तमाशबीन बने रहे।
क्या होगी कार्रवाई?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि—
*नीतीश कुमार इस घटना पर क्या स्टैंड लेते हैं?
*क्या पुलिस जदयू सांसद अजय मंडल पर कोई कार्रवाई करेगी?
*क्या मीडिया संस्थान इस मुद्दे को लेकर विरोध करेंगे?
निष्कर्ष: बिहार में बेलगाम हो रहे जनप्रतिनिधि?
यह घटना बिहार में लोकतंत्र की स्वतंत्रता और प्रेस की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अगर सरकार इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं करती, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि सत्ताधारी दल के नेताओं को कानून से ऊपर माना जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि पत्रकारों की सुरक्षा और लोकतंत्र की स्वतंत्रता के लिए बिहार सरकार क्या कदम उठाती है।
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