बिहार की राजनीति में इन दिनों भोजन की लागत को लेकर घमासान मचा हुआ है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने दावा किया है कि बिहार में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मेहमानों को ₹6000 प्रति प्लेट की दर से भोजन कराया गया। इस दावे के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पलटवार करते हुए CAG (कैग) रिपोर्ट पेश कर दी, जिसमें सरकारी खर्चों की विस्तृत जानकारी दी गई है। यह विवाद अब राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है।
प्रधानमंत्री मोदी के भोज पर उठा विवाद
यह पूरा विवाद उस समय उभरकर सामने आया जब बिहार में 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन पर आयोजित भोज की लागत पर सवाल उठाए गए। यह भोज बिहार विधानसभा के शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित किया गया था। आरजेडी ने आरोप लगाया कि इस भोज में प्रत्येक अतिथि के लिए ₹6000 प्रति प्लेट का खर्च किया गया, जो अत्यधिक और अनावश्यक था।
आरजेडी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि,
"जब गरीब जनता महंगाई से जूझ रही है, तब सरकार हजारों रुपये प्रति प्लेट खर्च कर मेहमानों को भोजन करवा रही है। बिहार की जनता को जवाब चाहिए कि आखिर इस धनराशि का हिसाब कौन देगा?"
बीजेपी का जवाब – कैग रिपोर्ट पेश कर किया पलटवार
आरजेडी के इस आरोप के बाद बीजेपी ने तुरंत कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए जवाब दिया। बीजेपी नेता संबित पात्रा और बिहार बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने आरजेडी पर ही निशाना साधते हुए कहा कि,
"तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी पहले यह बताएं कि उनके शासन में सरकारी फंड का किस तरह उपयोग हुआ। बिहार में जब वे सत्ता में थे, तब भ्रष्टाचार चरम पर था।"
बीजेपी ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह दावा किया कि भोज की वास्तविक लागत को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भोज की लागत अत्यधिक नहीं थी, बल्कि इसमें सुरक्षा व्यवस्था, आयोजन स्थल की सजावट और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च भी शामिल था।
क्या कहती है CAG रिपोर्ट?
बीजेपी द्वारा पेश की गई कैग रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि:
- भोज की कुल लागत आयोजन की भव्यता और सुरक्षा इंतजामों को ध्यान में रखते हुए तय की गई थी।
- इसमें भोजन के अलावा आयोजन स्थल की सजावट, मेहमानों की आवभगत, सुरक्षा खर्च और अन्य प्रोटोकॉल शामिल थे।
- रिपोर्ट के अनुसार, ₹6000 प्रति प्लेट का कोई प्रमाणिक रिकॉर्ड नहीं है।
बीजेपी नेताओं ने आरजेडी को 'भ्रम फैलाने' और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाने के लिए झूठे आंकड़े पेश कर रही है।
जनता की प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल
इस विवाद के बाद बिहार की जनता भी दो धड़ों में बंट गई है।
- आरजेडी समर्थकों का मानना है कि सरकारी खर्च का सही लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
- बीजेपी समर्थकों का तर्क है कि विपक्षी दल गलत जानकारी फैला रहे हैं और सरकार के कामों को बेवजह बदनाम कर रहे हैं।
वहीं, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भोज की वास्तविक लागत से ज्यादा बड़ा मुद्दा इसकी पारदर्शिता और जवाबदेही है। यदि सरकार इस बारे में स्पष्ट आंकड़े पेश करती है तो जनता को सही जानकारी मिल सकेगी।
क्या होगा इस विवाद का असर?
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में राजनीतिक माहौल लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर गर्माया हुआ है।
- आरजेडी इसे सरकार की फिजूलखर्ची का मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाना चाहती है।
- बीजेपी कैग रिपोर्ट को आधार बनाकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है।
आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर और कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और क्या बिहार सरकार इस विवाद पर कोई स्पष्टीकरण देती है या नहीं।
क्या यह सिर्फ राजनीतिक सियासत है या इसमें कोई सच्चाई छिपी है? यह सवाल अब जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
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