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चंद्रा टाइम्स

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Motihari news : बिहार: शटर कटवा के नाम से कुख्यात चेलवा और बैला को चरस तस्करी में 14 साल की सजा

मोतिहारी: बिहार में अपराध की दुनिया में शटर कटवा गैंग के रूप में कुख्यात रहे शमीर शाह उर्फ चेलवा और सलमान शाह उर्फ बैला को चरस तस्करी के मामले में 14 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। मोतिहारी के एनडीपीएस कोर्ट-2 के विशेष न्यायाधीश सूर्यकांत तिवारी ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अगर दोनों आरोपी अर्थदंड का भुगतान नहीं करते हैं, तो उन्हें छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

कैसे पकड़े गए चेलवा और बैला?

घटना 11 सितंबर 2021 की है, जब गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने घोड़ासहन थाना क्षेत्र में बलान मोड़ के पास वाहन जांच अभियान चलाया था। इस दौरान नेपाल से अपाची बाइक पर सवार होकर दो युवक भारत में प्रवेश कर रहे थे। पुलिस को उन पर संदेह हुआ और तलाशी ली गई।

तलाशी के दौरान, एक काले रंग के बैग में तीन किलो चार सौ ग्राम चरस बरामद हुआ। पुलिस ने तत्काल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।


गवाहों और सबूतों के आधार पर हुई सजा

मामले की सुनवाई एनडीपीएस वाद संख्या 89/2021 के तहत हुई।

  • विशेष लोक अभियोजक प्रभाष त्रिपाठी ने 12 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया और मजबूत साक्ष्य पेश किए।
  • न्यायाधीश ने सभी साक्ष्यों को सुनने के बाद दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया और 14 साल की सजा सुनाई।

चेलवा और बैला: पहले 'शटर कटवा', अब चरस तस्कर

शमीर शाह उर्फ चेलवा और सलमान शाह उर्फ बैला बिहार समेत देशभर में 'शटर कटवा' के रूप में कुख्यात रहे हैं। ये दोनों रातों-रात दुकानों और गोदामों के शटर काटकर चोरी करने के लिए कुख्यात थे।

हालांकि, पुलिस के बढ़ते दबाव और चोरी के मामलों में सख्ती के कारण दोनों ने चोरी छोड़कर चरस तस्करी का नया धंधा शुरू कर दिया। चरस तस्करी में शामिल होने के बाद, दोनों अपराधी नेपाल और बिहार के सीमावर्ती जिलों में ड्रग सप्लाई का नेटवर्क खड़ा कर चुके थे।

मोतिहारी पुलिस के लिए चेलवा और बैला लंबे समय से चुनौती बने हुए थे। पुलिस को लगातार इनके खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन हर बार ये बच निकलते थे।


कैसे काम करता था चेलवा-बैला का चरस तस्करी रैकेट?

  • नेपाल से ड्रग्स की तस्करी: दोनों आरोपी नेपाल से चरस लाकर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में सप्लाई करते थे।
  • छोटे अपराधियों को जोड़कर बनाया नेटवर्क: इनके नेटवर्क में कई स्थानीय अपराधी शामिल थे, जो छोटे स्तर पर तस्करी का काम करते थे।
  • बाइक और कार के जरिए सप्लाई: पुलिस जांच से बचने के लिए ये लोग बाइक और कार का इस्तेमाल करते थे।

पुलिस के लिए राहत, अपराध जगत को बड़ा झटका

चेलवा और बैला की गिरफ्तारी और सजा से बिहार पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इनके जेल जाने से नेपाल-बिहार ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर असर पड़ेगा।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले के अन्य साथियों की भी पहचान की जा रही है और उन पर भी कार्रवाई होगी।


क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी?

घोड़ासहन थाना प्रभारी ने कहा:

"चेलवा और बैला लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बने हुए थे। पहले ये 'शटर कटवा' गिरोह चलाते थे, लेकिन बाद में इन्होंने ड्रग तस्करी का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। अब इनके जेल जाने से ड्रग तस्करी पर बड़ी चोट पड़ी है।"


अब आगे क्या?

  • पुलिस अन्य तस्करों और इस गिरोह से जुड़े अन्य अपराधियों की तलाश कर रही है।
  • नेपाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था सख्त की जा रही है।
  • ड्रग माफियाओं पर और भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

निष्कर्ष

चेलवा और बैला की गिरफ्तारी और 14 साल की सजा बिहार पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी है। नेपाल-बिहार सीमा पर चल रहे चरस तस्करी रैकेट को बड़ा झटका लगा है। अब देखना होगा कि इस कार्रवाई से अपराध पर कितना असर पड़ता है और पुलिस आगे क्या कदम उठाती है। 

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