बेतिया, बिहार – बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी की वरिष्ठ नेता और मंत्री रेणु देवी के भाई रवि कुमार उर्फ पिन्नू पर कारोबारी के अपहरण और जमीन के कागजात पर जबरन अंगूठा लगवाने का गंभीर आरोप लगा है।
घटना सीसीटीवी में कैद
शनिवार को बेतिया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में रवि कुमार ने अपने गुर्गों के साथ व्यापारी शिवपूजन महतो को पिस्तौल दिखाकर अगवा कर लिया। घटना के दौरान वह शिवपूजन को जबरन कार में बिठाकर पुष्पांजलि होटल ले गया, जो पिन्नू का ही बताया जाता है। होटल में शिवपूजन को धमकाकर जमीन के कागजात पर अंगूठा लगवाया गया।
इस वारदात का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें पिन्नू व्यापारी को पिस्तौल के दम पर घसीटता हुआ नजर आ रहा है। पुलिस ने इस फुटेज को कब्जे में लेकर रवि कुमार के खिलाफ अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस की कार्रवाई और पिन्नू की तलाश
घटना के बाद पुलिस ने पुष्पांजलि होटल और पिन्नू के घर पर छापेमारी की, लेकिन वह फरार हो गया। बेतिया के एसडीपीओ विवेक दीप ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, "सीसीटीवी फुटेज से सभी तथ्य स्पष्ट हैं, और पिन्नू को जल्द ही हिरासत में लिया जाएगा।"
मंत्री रेणु देवी पर उठे सवाल
इस घटना के बाद मंत्री रेणु देवी भी विवादों में घिर गई हैं। हालांकि, उन्होंने पिन्नू के साथ किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है। रेणु देवी ने कहा है कि उनका भाई के आपराधिक गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है।
स्थानीय लोग, हालांकि, इसे अलग नजरिए से देखते हैं। उनका कहना है कि मंत्री के पद का दुरुपयोग करके पिन्नू अपने आपराधिक कृत्यों को अंजाम देता है। यह पहला मौका नहीं है जब पिन्नू पर इस तरह के आरोप लगे हैं। 2022 में भी उसने एक डॉक्टर की जमीन हड़पने का प्रयास किया था।
विपक्ष का हमला
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मामले को लेकर बिहार सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, "रेणु देवी के भाई के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन वह अब भी बेखौफ होकर अपराध कर रहा है। क्या बीजेपी ऐसे अपराधियों को संरक्षण दे रही है?" तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर सरकार पर हमला बोला।
सवालों के घेरे में सरकार
इस घटना ने एक बार फिर बिहार में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक तरफ पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत है, वहीं विपक्ष इसे सत्ताधारी पार्टी की विफलता बता रहा है।
बिहार की जनता अब यह देख रही है कि क्या इस मामले में न्याय होगा या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह राजनीति के दबाव में दबा दिया जाएगा।
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