बसंत पंचमी का पर्व इस वर्ष 3 फरवरी 2025, सोमवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। हरि दर्शन सेवा संस्थान फाउंडेशन ट्रस्ट के संस्थापक आचार्य डॉक्टर नवनीत कुमार ने बताया कि यह त्योहार हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस दिन ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।
बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन आती है और इसे सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और इसी दिन से होली का शुभारंभ भी माना जाता है। मां सरस्वती को विद्या, संगीत और कला की देवी माना जाता है, इसलिए विद्यार्थियों, शिक्षकों और संगीत से जुड़े लोगों के लिए यह दिन विशेष होता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
आचार्य डॉक्टर नवनीत के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन पंचमी तिथि का आरंभ 2 फरवरी 2025, रविवार को दोपहर 12:04 बजे से होगा और इसका समापन 3 फरवरी 2025, सोमवार को सुबह 09:49 बजे होगा। इसी दिन सरस्वती पूजन के साथ ही हल पूजन भी किया जाता है, जिसे किसान अपनी फसल की उन्नति के लिए करते हैं।
पूजन विधि और प्रसाद
मां सरस्वती की पूजा विशेष रूप से प्रातःकाल करना उत्तम माना जाता है। पूजन में सफेद वस्त्र, सफेद फूल और दूध से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा की शुरुआत करवाते हैं, जिसे विद्या आरंभ संस्कार कहते हैं।
अचला सप्तमी व्रत
बसंत पंचमी के अगले दिन 4 फरवरी 2025, मंगलवार को अचला सप्तमी व्रत रखा जाएगा। यह व्रत सूर्य भगवान की आराधना के लिए किया जाता है और इसे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है।
बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान, कला और उल्लास का प्रतीक है। इस दिन मां सरस्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्तगण पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करेंगे।
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