बिहार में जहरीली शराब के खिलाफ सख्त कदम, पंचायत प्रतिनिधियों और चौकीदारों को सौंपी गई अहम जिम्मेदारी
बिहार सरकार ने राज्य में जहरीली शराब से हो रही मौतों पर सख्ती से अंकुश लगाने के लिए एक नया निर्णय लिया है। सरकार के आदेश पर पुलिस मुख्यालय ने सभी पंचायत प्रतिनिधियों, वार्ड पार्षदों और चौकीदारों को शराब के अवैध कारोबार को रोकने में अहम भूमिका निभाने के निर्देश दिए हैं। अब पंचायत स्तर तक यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जहरीली शराब का निर्माण और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।
पंचायत स्तर पर सख्ती से होगी निगरानी
बिहार के विभिन्न जिलों में जहरीली शराब के सेवन से लगातार मौतों की खबरें आ रही थीं, जिससे सरकार पर इस समस्या के समाधान के लिए दबाव बढ़ गया था। इसी के मद्देनजर पुलिस मुख्यालय ने यह निर्णय लिया कि अब पंचायत प्रतिनिधि, वार्ड पार्षद और चौकीदार शराब माफियाओं की पहचान कर पुलिस को इसकी जानकारी देंगे।
राज्य में यह पहल इसलिए भी जरूरी मानी जा रही है क्योंकि शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद अवैध शराब का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस अवैध शराब बेचने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजती है, लेकिन आरोपी जमानत पर छूटकर फिर से इस अवैध कारोबार में लग जाते हैं। अब सरकार ने निर्देश दिया है कि बेल पर छूटे अपराधियों की निगरानी सख्ती से की जाएगी और उन पर लगातार नजर रखी जाएगी।
जहरीली शराब के बढ़ते खतरे
बिहार में शराबबंदी के बावजूद शराब माफिया सक्रिय हैं और अवैध रूप से जहरीली शराब बेचने का काम कर रहे हैं। हाल के महीनों में छपरा, सीवान, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज और अन्य जिलों में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की जान गई है। कई गरीब और मजदूर तबके के लोग इस जहरीली शराब का सेवन करते हैं और अपनी जान गंवा देते हैं।
सरकार का मानना है कि इस अवैध कारोबार को खत्म करने के लिए पंचायत स्तर पर प्रतिनिधियों की मदद ली जानी चाहिए। क्योंकि गांव और मोहल्लों में मुखिया, वार्ड पार्षद और चौकीदार की मजबूत पकड़ होती है और उन्हें इलाके के सभी गतिविधियों की जानकारी होती है। इसी कारण अब इन प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है कि वे अपने क्षेत्र में शराब के अड्डों की पहचान कर पुलिस को सूचित करें।
पुलिस और उत्पाद विभाग की साझा रणनीति
बिहार में उत्पाद विभाग और पुलिस मिलकर अवैध शराब के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को यह निर्देश दिया है कि वे पंचायत स्तर पर मुखिया और वार्ड पार्षदों से नियमित संपर्क में रहें और अवैध शराब के ठिकानों पर छापेमारी करें।
मुजफ्फरपुर के सहायक आयुक्त उत्पाद विजय शेखर दुबे ने बताया कि शराब माफियाओं और स्प्रिट तस्करों की पहचान कर लगातार उन पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आम जनता से अपील भी की है कि यदि उन्हें किसी स्थान पर अवैध शराब की बिक्री की जानकारी मिले, तो तुरंत उत्पाद विभाग या पुलिस को सूचित करें।
जनता से भी मांगी गई मदद
सरकार और पुलिस ने आम जनता से भी इस मुहिम में सहयोग करने की अपील की है। प्रशासन ने टोल फ्री नंबर जारी करने की योजना बनाई है, ताकि कोई भी व्यक्ति गुप्त रूप से शराब माफियाओं के बारे में सूचना दे सके। इसके अलावा, मुखिया, वार्ड पार्षद और चौकीदारों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वे इस अभियान में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।
क्या होगी सजा?
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी पंचायत प्रतिनिधि या स्थानीय अधिकारी को अवैध शराब के बारे में जानकारी होने के बावजूद उन्होंने इसे पुलिस तक नहीं पहुंचाया, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई मुखिया, वार्ड पार्षद या चौकीदार शराब माफियाओं से मिलीभगत रखते हुए पकड़ा गया, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पद से हटाया भी जा सकता है।
निष्कर्ष
बिहार सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम राज्य में अवैध शराब कारोबार पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि पंचायत स्तर पर इस फैसले को सही तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे जहरीली शराब के कारण हो रही मौतों पर काफी हद तक रोक लग सकती है। सरकार, पुलिस और पंचायत प्रतिनिधियों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि शराबबंदी का कानून प्रभावी ढंग से लागू हो और कोई भी व्यक्ति अवैध शराब के चंगुल में न फंसे।
अब देखना होगा कि यह नई रणनीति कितनी सफल होती है और बिहार में शराबबंदी को सख्ती से लागू करने में सरकार कितनी प्रभावी साबित होती है।
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