सहरसा: बिहार के कोसी क्षेत्र में कृषि शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंडित मंडन मिश्र कृषि महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग तेज हो गई है। कोशी विकास संघर्ष मोर्चा ने इस संबंध में बिहार सरकार के कृषि मंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि इस प्रतिष्ठित संस्थान को "पंडित मंडन मिश्र कृषि विश्वविद्यालय" के रूप में मान्यता प्रदान की जाए।
संघर्ष मोर्चा द्वारा भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि यह महाविद्यालय पिछले कई वर्षों से कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दे रहा है। बिहार के कोसी क्षेत्र में यह संस्थान न केवल कृषि विज्ञान के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रहा है।
संघठन का कहना है कि यह महाविद्यालय विश्वविद्यालय बनने के लिए आवश्यक सभी मानकों को पूरा करता है। इसमें आधुनिक प्रयोगशालाएँ, कृषि अनुसंधान केंद्र, पुस्तकालय, छात्रावास, स्मार्ट कक्षाएँ और अन्य अनुसंधान सुविधाएँ पहले से ही उपलब्ध हैं, जो इसे विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करने के लिए पूरी तरह सक्षम बनाती हैं।
संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष श्री विनोद कुमार झा और संरक्षक श्री प्रवीण आनंद ने कहा कि जब भागलपुर से कटकर सहरसा जिला और प्रमंडल बन सकता है, और प्रमंडलीय स्तर के अन्य संस्थान यहाँ स्थापित हो सकते हैं, तो कृषि विश्वविद्यालय भी सहरसा में ही मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि यह महाविद्यालय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के मानकों को पूरा करता है और इसमें उच्च स्तरीय शोध हो रहे हैं, जिससे बिहार के कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिल रही है।
संघठन ने सरकार से इस मांग पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है। साथ ही यह भी चेतावनी दी है कि यदि इस मांग को नजरअंदाज किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। कोसी क्षेत्र के किसानों, शिक्षाविदों और छात्रों से भी अपील की गई है कि वे इस संघर्ष में शामिल होकर सरकार पर दबाव बनाएं ताकि क्षेत्र को एक पूर्ण कृषि विश्वविद्यालय का दर्जा मिल सके।
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