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चंद्रा टाइम्स

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Unique Places to Visit in Saharsa : सहरसा जिले के पाँच प्रसिद्ध मंदिर : आस्था और श्रद्धा का संगम


Top 5 Place to Visit in Saharsa

सहरसा जिला, बिहार का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। यहां कई मंदिर स्थित हैं, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। इस लेख में, हम सहरसा जिले में स्थित पाँच प्रमुख मंदिर के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे, जो भक्तों और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

1. श्री उग्रतारा स्थान (Ugratara Temple, Mahishi)



श्री उग्रतारा मंदिर सहरसा स्टेशन से लगभग 17 किलोमीटर पश्चिम में महिषी (Mahishi) गांव में स्थित है। यह प्राचीन मंदिर भगवती तारा को समर्पित है, जिनकी मूर्ति अत्यंत प्राचीन और श्रद्धेय मानी जाती है। मुख्य प्रतिमा के दोनों ओर दो छोटी देवियाँ, एकजटा और नील सरस्वती, स्थापित हैं। नवरात्रि के दौरान यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, और तांत्रिक साधक भी विशेष पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।

2. संत बाबा कारू खिरहरी मंदिर (Sant Karu Khirhari Temple, Mahpura)


कोसी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर संत बाबा कारू खिरहरी को समर्पित है, जो अपनी शिव-भक्ति और गौसेवा के लिए प्रसिद्ध थे। मंदिर महिषी प्रखंड के महपुरा (Mahpura) गांव में, प्रखंड कार्यालय से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां श्रद्धालु बाबा को दूध अर्पित करते हैं और खीर का भोग लगाते हैं। मंदिर की मान्यता है कि यहाँ बीमार पशुओं को लाने से वे स्वस्थ हो जाते हैं।

3. सूर्य मंदिर (Surya Temple, Kandaha)



कंदाहा (Kandaha) गांव में स्थित यह सूर्य मंदिर एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा मान्यता प्राप्त है। यह सहरसा जिला मुख्यालय से लगभग 16 किलोमीटर पश्चिम में, महिषी प्रखंड के पस्तवार पंचायत में स्थित है। मंदिर में सात घोड़ों के रथ पर सवार भगवान सूर्य की भव्य मूर्ति ग्रेनाइट पत्थर पर उकेरी गई है।

4. चंडिका स्थान (Chandika Temple, Biratpur)



सोनबरसा प्रखंड के बिराटपुर (Biratpur) गांव में स्थित चंडिका स्थान देवी चंडी के प्राचीन मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह गांव महाभारत काल के राजा विराट से जुड़ा हुआ माना जाता है, जहां पांडवों ने अपने अज्ञातवास का समय बिताया था। तांत्रिक विद्वान और भक्त इस चंडी मंदिर को विशेष महत्व देते हैं, और नवरात्रि के दौरान यहाँ भारी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।

इन धार्मिक स्थलों की यात्रा न केवल आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है, बल्कि सहरसा जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराती है। यदि आप सहरसा की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन शक्तिपीठों के दर्शन अवश्य करें और अपनी यात्रा को स्मरणीय बनाएं।

6. मत्स्यगंधा मंदिर (Matsyagandha Temple, Saharsa)

सहरसा शहर में स्थित मत्स्यगंधा मंदिर, जिसे रक्त काली मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, देवी काली को समर्पित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। मंदिर की अंडाकार संरचना और इसकी दीवारों पर उकेरी गई 64 योगिनियों की आकृतियाँ इसे विशिष्ट बनाती हैं। बिहार सरकार ने इस क्षेत्र को एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया है, जिससे यह स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहाँ नियमित रूप से महायोगिनी मेला आयोजित किया जाता है, जो सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र होता है।

इन धार्मिक स्थलों की यात्रा न केवल आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है, बल्कि सहरसा जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराती है। यदि आप सहरसा की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन शक्तिपीठों के दर्शन अवश्य करें और अपनी यात्रा को स्मरणीय बनाएं।






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