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चंद्रा टाइम्स

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Madhepura News : सरकार की नल-जल योजना हो रही फेल साबित, कई क्षेत्रों में जल संकट गहराया



उदाकिशुनगंज: सरकार की महत्त्वाकांक्षी 'हर घर नल-जल योजना' अपने उद्देश्यों को पूरा करने में विफल होती दिख रही है। उदाकिशुनगंज प्रखंड के खाड़ा पंचायत के कई वार्डों में महीनों से जलमीनार खराब पड़ी हैं, जिससे लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं। कहीं जलमीनार शोभा की वस्तु बनकर रह गई हैं तो कहीं से पीला पानी आ रहा है, जो पीने योग्य नहीं है।

आधी आबादी को नहीं मिला कनेक्शन

खाड़ा पंचायत के वार्ड संख्या 5, 13 और 2 सहित कई इलाकों में नल-जल योजना का क्रियान्वयन अधूरा रह गया है। यहां के लोगों को अब भी शुद्ध पेयजल के लिए तरसना पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों में प्रत्येक घर तक नल का जल पहुंचाने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पंचायत के अधिकांश इलाकों में सिर्फ आधी आबादी को ही कनेक्शन मिला है, जबकि बाकी लोग अभी भी इस सुविधा से वंचित हैं। कई बार अखबारों में यह मामला उठने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सफाई और रखरखाव पर नहीं है ध्यान

गांव में स्थापित जलमिनारों की नियमित सफाई नहीं होने से पानी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, कई जगहों पर नल से आने वाला पानी पीला होता है, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि पशुओं को भी देने योग्य नहीं है।

स्थानीय लोगों की नाराजगी

गांव के मदन कुमार, वार्ड पंच प्रतिनिधि उमेश पासवान, कारी पासवान, मंगल ठाकुर, प्रमोद कुमार पासवान, चंदन कुमार झा, राजेश रंजन, पैक्स अध्यक्ष कमलेश झा और संजीव कुमार कश्यप सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि तीन साल पहले नल-जल योजना के तहत पाइप बिछाकर जलापूर्ति शुरू की गई थी, लेकिन कुछ महीनों में ही यह व्यवस्था ठप हो गई। कुछ स्थानों पर तो अब तक कनेक्शन भी नहीं मिल पाया है।

वोल्टास कंपनी के कर्मचारी हड़ताल पर

नल-जल योजना के संचालन में वोल्टास कंपनी द्वारा पंचायत में नियुक्त कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से स्थिति और बिगड़ गई है। कर्मचारी अपने मानदेय में वृद्धि की मांग कर रहे हैं और जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी, तब तक वे हड़ताल पर रहेंगे। इससे नल-जल योजना पूरी तरह से ठप हो गई है।

जल्द समाधान की मांग

ग्रामीणों ने वरीय पदाधिकारियों से जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने और नल-जल योजना को सुचारू रूप से चालू करने की मांग की है। यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो जल संकट और गहरा सकता है।

सरकार की यह योजना जिन उद्देश्यों के तहत शुरू की गई थी, यदि समय रहते इसमें सुधार नहीं किया गया, तो यह भी अन्य योजनाओं की तरह सिर्फ कागजों में सिमटकर रह जाएगी।

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