सुपौल: पांच साल के लंबे इंतजार के बाद, एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को आखिरकार न्याय मिल गया है। सुपौल की एक अदालत ने सोमवार को एक निजी शिक्षक को अपनी 11 वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म करने के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम सह विशेष न्यायाधीश पोक्सो बृज किशोर सिंह की अदालत ने दोषी शिक्षक संजीत कुमार पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर उसे छह महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
यह मामला 2019 का है, जब संजीत कुमार ने छातापुर थाना क्षेत्र में अपनी ट्यूशन क्लास में कक्षा 5 की छात्रा के साथ दुष्कर्म किया था। पीड़िता के भाई ने इस घटना की शिकायत दर्ज कराई थी।
घटना का विवरण:
शिकायत के अनुसार, पीड़िता 15 जून, 2019 को अपनी ट्यूशन क्लास में गई थी। शाम करीब 6 बजे, संजीत कुमार ने उसे पानी लाने के लिए कहा। जब वह पानी लेने गई, तो शिक्षक ने उसे जबरदस्ती एक कमरे में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद, वह पीड़िता को उसके घर के पास छोड़कर भाग गया।
मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि:
पीड़िता की मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इसके अलावा, पीड़िता और दोषी के कपड़ों की जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भागलपुर भी भेजा गया, जहां दुष्कर्म की पुष्टि हुई।
अदालत का फैसला:
अदालत ने सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर संजीत कुमार को दोषी पाया। उसे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (3) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
अभियोजन पक्ष की भूमिका:
अभियोजन पक्ष की अधिवक्ता विशेष लोक अभियोजक पोक्सो नीलम कुमारी ने अदालत में मामले की गंभीरता को रखा और पीड़िता के लिए न्याय की मांग की। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता करुणाकांत झा ने बहस में हिस्सा लिया।
पीड़िता को मिला न्याय:
पांच साल के लंबे इंतजार के बाद, पीड़िता को आखिरकार न्याय मिल गया है। अदालत के इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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