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चंद्रा टाइम्स

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Saharsa News : चैनपुर पंचायत के पूर्व मुखिया और समाजसेवी चंद्रमोहन झा का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर।


नवीन मिश्रा/चंद्रा टाइम्स सहरसा : चैनपुर पंचायत के एक युग का अंत हो गया। आदरणीय श्री चंद्रमोहन झा उर्फ सोहन झा, जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक "मुखिया जी" कहकर संबोधित करते थे, आज दिनांक 01 अप्रैल 2025 को अपने जीवन की अंतिम सांस लेकर पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। पंचायत का शायद ही कोई ऐसा घर हो, जहां इस दुखद समाचार से व्यथा न हो। जनसैलाब उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा, और पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

श्री चंद्रमोहन झा एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने अपने कुशल नेतृत्व और निष्पक्ष प्रशासन से पंचायत को प्रगति की राह पर आगे बढ़ाया। सन् 1978 में जब उन्होंने पहली बार चैनपुर पंचायत के मुखिया का पद संभाला, तब से लेकर वर्ष 2006 तक और पुनः वर्ष 2011 से 2016 तक वे इस पद पर आसीन रहे। पूरे 34 वर्षों तक उन्होंने पंचायत की बागडोर संभाली और बिना किसी आरोप या विवाद के अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। उनके नेतृत्व में पंचायत ने विकास के नए आयाम देखे। वे जनता के प्रिय थे, क्योंकि वे हर वर्ग, हर समुदाय के लोगों को समान सम्मान देते थे। उनके दरवाजे हर किसी के लिए खुले रहते थे और उनकी पंचायत न्यायप्रियता के लिए जानी जाती थी।

सिर्फ एक प्रशासक ही नहीं, बल्कि वे एक बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी थे। कला और संस्कृति से गहरा लगाव रखने वाले मुखिया जी ने अपने जीवन में कई रूपों में समाज की सेवा की। कुश्ती के क्षेत्र में उनका नाम बड़े सम्मान से लिया जाता था। वे अपने जमाने के अपराजित पहलवानों में से एक थे और उनकी कुश्ती कला ने कई लोगों को प्रेरित किया। इसके अलावा, वे रंगमंच के भी बड़े कलाकार थे। जब भी कोई नाटक या मंचन होता, वे हमेशा नायक की भूमिका निभाते। उनके अभिनय में ऐसी जीवंतता होती कि लोग मंत्रमुग्ध हो जाते। उनके विषय कीर्तन की बात करें तो जब वे अपने सुमधुर स्वर में कीर्तन करते, तो श्रोता भावविभोर हो जाते थे। समाज के मनोरंजन और सांस्कृतिक उन्नति में उनका योगदान अविस्मरणीय है।

उनका व्यक्तित्व संतुलित और प्रेरणादायक था। वे हमेशा "सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः" के सिद्धांत पर चलते थे। वे चाहते थे कि समाज के सभी लोग सुखी और स्वस्थ रहें। पंचायत के हर व्यक्ति की समस्या को वे अपनी समस्या समझते थे। कोई भी व्यक्ति जब उनके पास अपनी परेशानी लेकर जाता, तो वे उसे निराश नहीं लौटने देते थे। वे हर संभव सहायता के लिए तत्पर रहते थे। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना उनका जीवन का एक अभिन्न हिस्सा था। उन्होंने पंचायत में न केवल भौतिक विकास किया, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों को भी मजबूती प्रदान की।

उनका परिवार भी समाजसेवा के क्षेत्र में अग्रसर है। उनके छोटे पौत्र श्री सागर कुमार झा, जो वर्तमान में किशनगंज जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं, अपने दादा के पदचिन्हों पर चलते हुए जनता की सेवा कर रहे हैं। वे अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित और न्यायप्रिय अधिकारी हैं, जिन पर परिवार को गर्व है।
आज जब मुखिया जी पंचतत्व में विलीन हो रहे हैं, तो पूरा चैनपुर पंचायत उनके सम्मान में एकजुट है। उनके अंतिम संस्कार में जनसैलाब उमड़ा, और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा पंचायत एक परिवार बन गया हो। लोग अपने नेता, अपने संरक्षक को खोने के गम में डूबे थे। वे सिर्फ एक मुखिया नहीं थे, बल्कि वे चैनपुर पंचायत की आत्मा थे। उनके योगदान को शब्दों में समेटना कठिन है, लेकिन उनका जीवन, उनके आदर्श और उनकी सेवा हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेंगे। उनकी कमी कभी पूरी नहीं की जा सकेगी, लेकिन उनका आशीर्वाद और उनके द्वारा दिखाया गया मार्ग लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

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